A story by Premchand "Eidgah" - Audio


This is an edited version of the story written by the author Munshi Premchand; Written in Urdu. A very few know that it was first written under the pen name Nawab Rai. https://en.wikipedia.org/wiki/Idgah_(short_story)

तू बाहार लाया हैं

ये कोमल हत्हलिया जब भी मेरा दामन छूती हैं
इक सकून रोम रोम मैं छाने लगता हैं
मेरी गोद मैं जब तू समां जाता  हैं 
मेरा ये मन गुन्गुनान्ने लगता हैं 

तेरे आने से ही जिंदगी मैं बाहार आई हैं 
वर्ना पतझड़ ने डेरा डाला था 

तेरे संग तो पतझड़ में संगीत छाया हैं
तेरी किलकारियों ने अब सुर सजाया हैं
जिंदगी मैं अब इक नशा सा छाया हैं
तेरी बातों ने जाम मिलाया हैं 

VAQT GAYA

गया वक्त - वक्त गया

आज कल मैं ढल गया 
कुछ पता न चला

चाह है कुछ करेंगे कल
कुछ तो कर सकंगे कल

पर कल जो आज था
वो अब हो गया है कल

गुजरते जा रहें है हर दम   
जिंदगी के यें कीमती पल


कल कुछ करने की चiह ने रखा है कायम आज तक